दुष्यन्त कुमार

[मंच पर बैठे हुए सर्व श्री डॉ॰ जगदीश व्योम, संजीव गौतम, प्रताप दीक्षित, विनोद सोनकिया, ओमप्रकाश नदीम, नासिर अली नदीम, सोम ठाकुर, कमलेशभट्ट कमल, भावना तिवारी, शास्त्री नित्यगोपाल कटारे, जमुनाप्रसाद उपाध्याय, अशोक रावत]
दुष्यन्त कुमार

कहीं पे धूप की चादर बिछा के बैठ गए
आज सड़कों पर लिखे हैं सैकड़ों नारे न देख
इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
बाढ़ की संभावनाएँ सामने हैं
मत कहो, आकाश में कुहरा घना है